प्रशांत किशोर पर क्यों नहीं पड़ते छापे: मोदी के एक फोन पर UN की नौकरी छोड़ी: क्या है PK की पॉलिटिक्स

प्रशांत किशोर पर क्यों नहीं पड़ते छापे: मोदी के एक फोन पर UN की नौकरी छोड़ी, 6 साल में 6 सीएम बनवाए; PK की पॉलिटिक्स क्या है। प्रशांत किशोर (पीके) की राजनीति पर एक नज़र ::
जिन्हें राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है, अब खुद एक राजनीतिक पार्टी ‘जन सुराज’ के संस्थापक और नेता बन चुके हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले पीके की चर्चा चरम पर है।

1. पीके का सफर: यूएन जॉब से राजनीति तक:
पीके का जन्म 1977 में बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में हुआ। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन पब्लिक हेल्थ में पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा के बाद संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में 8 साल काम किया। वे अफ्रीका (चाड) में यूएन के सोशल पॉलिसी और स्ट्रैटेजिक प्लानिंग डिविजन के प्रमुख थे।
2. मोदी का फोन और राजनीति में एंट्री:
2011 में, पीके ने कुपोषण पर एक रिसर्च पेपर लिखा, जिसमें गुजरात का भी जिक्र था। तत्कालीन गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन किया। पीके ने यूएन जॉब छोड़ दी और 2012 गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी की रणनीति बनाई। फिर 2014 लोकसभा चुनाव में ‘चाय पे चर्चा’, 3D रैलियां और सोशल मीडिया कैंपेन से मोदी को पीएम बनाने में अहम भूमिका निभाई। यह ‘मोदी के एक फोन पर जॉब छोड़ने’ वाली कहानी का मूल है।
3. 6 साल में 6 सीएम: क्या यह सही है?
| वर्ष | नेता/पार्टी | चुनाव | भूमिका | परिणाम |
|---|---|---|---|---|
| 2012 | नरेंद्र मोदी (बीजेपी) | गुजरात विधानसभा | रणनीतिकार (CAG के जरिए) | मोदी तीसरी बार सीएम बने |
| 2014 | नरेंद्र मोदी (बीजेपी) | लोकसभा | कैंपेन लीडर (चाय पे चर्चा, 3D रैलियां) | मोदी पीएम बने |
| 2015 | नीतीश कुमार (जेडीयू-आरजेडी गठबंधन) | बिहार विधानसभा | I-PAC के जरिए स्ट्रैटेजी (‘हर घर दस्तक’) | नीतीश तीसरी बार सीएम बने |
| 2016 | कैप्टन अमरिंदर सिंह (कांग्रेस) | पंजाब विधानसभा | कैंपेन डिजाइन | अमरिंदर सीएम बने |
| 2017 | जगन मोहन रेड्डी (वाईएसआरसीपी) | आंध्र प्रदेश विधानसभा | डेटा-बेस्ड कैंपेन | जगन सीएम बने |
| 2019 | एमके स्टालिन (डीएमके) | तमिलनाडु लोकसभा/विधानसभा | गठबंधन स्ट्रैटेजी | स्टालिन 2021 में सीएम बने (2019 की नींव) |
कुल मिलाकर: 9 में से 8 चुनाव जीते। बाद में ममता बनर्जी (2021, TMC), जय श्री राम (2021, AAP दिल्ली) जैसे और सफल कैंपेन। लेकिन 2017 यूपी में कांग्रेस हार गई। पीके ने 2021 में स्ट्रैटेजिस्ट का काम छोड़ दिया और खुद राजनीति में उतर आए।
क्यों नहीं पड़ते छापे? राजनीतिक साजिश या साफ छवि?
यह सवाल विपक्षी दलों (खासकर आरजेडी) की ओर से उठाया जाता है। पीके पर कोई बड़ा भ्रष्टाचार या मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप नहीं है। उनकी कंपनी I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) कंसल्टेंसी फीस लेती है, जो वैध है।
तथ्य:
- 2023 में, जब पीके ने नीतीश कुमार के खिलाफ बोलना शुरू किया, तो कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में ‘छापे क्यों नहीं’ का ट्रेंड चला। लेकिन कोई एजेंसी (ED, CBI, IT) ने कार्रवाई नहीं की।
- जनवरी 2025 में, BPSC पेपर लीक के विरोध में पीके की गिरफ्तारी हुई (धरना के लिए), लेकिन यह राजनीतिक नहीं, प्रशासनिक थी। वे भूख हड़ताल पर थे और बाद में रिहा हो गए।
- X (ट्विटर) पर हालिया पोस्ट्स में विपक्ष उन्हें ‘बीजेपी की B-टीम’ कहता है, लेकिन सबूत नहीं। पीके ने खुलकर NDA (बीजेपी-जेडीयू) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) दोनों की आलोचना की है। वे कहते हैं: “नीतीश 25 सीट से ज्यादा नहीं जीतेंगे, वरना मैं राजनीति छोड़ दूंगा।”
विश्लेषण: छापे न पड़ने का कारण उनकी ‘क्लीन इमेज’ है। वे प्रो-बोनो (फ्री) काम भी करते रहे। लेकिन राजनीतिक रूप से, बिहार में NDA के खिलाफ उनकी आलोचना से ‘साजिश’ की अफवाहें फैल रही हैं। वास्तव में, यह उनकी स्वतंत्र छवि को मजबूत करता है।
पीके की राजनीति क्या है?
पीके की राजनीति ‘गवर्नेंस-फर्स्ट’ है, न कि जाति-आधारित। वे बिहार को ‘शिक्षा और रोजगार का हब’ बनाना चाहते हैं। मुख्य बिंदु:
- जन सुराज पार्टी: 2022 में लॉन्च। 2025 बिहार चुनाव में सभी 243 सीटों पर लड़ेंगे। 51 कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी (16% मुस्लिम, 17% EBC)। 90% नए चेहरे, जैसे रिटायर्ड IAS/IPS, डॉक्टर।
- मुख्य एजेंडा:
- शिक्षा: हर ब्लॉक में ‘नेटारहाट’ जैसा स्कूल। सालाना 15,000 करोड़ खर्च।
- रोजगार: माइग्रेशन रोकना, 10 लाख नौकरियां।
- भ्रष्टाचार: हाल में अशोक चौधरी (जेडीयू) पर 200 करोड़ जमीन घोटाले का आरोप लगाया।
- रणनीति: पदयात्रा कैंपेन। युवाओं, EBC, महिलाओं पर फोकस। कोई गठबंधन नहीं, लेकिन पोस्ट-पोल ऑप्शन खुले।
- चुनौतियां: जाति की राजनीति (मुस्लिम-यादव vs ऊपरी जाति/OBC) में घुसपैठ मुश्किल। वे ‘वोट काटने वाले’ कहलाते हैं। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स में युवाओं में जोश है
- भविष्य: अगर 20-30 सीटें जीते, तो किंगमेकर बन सकते हैं। वरना, स्पॉइलर। X पर चर्चा: “पीके क्रांति ला रहे हैं” vs “बीजेपी का एजेंट”।



