भोपाल गौ मांस मामले में बड़ा अपडेट- सेशन कोर्ट से असलम कुरैशी को मिली जमानत….

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भोपाल बीफ़ केस में हाल ही में एक नया मोड़ आया है, जिसमें जिंसी बूचड़खाने के संचालक असलम कुरैशी का नाम शामिल है। इस मामले ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। जनवरी 2026 की शुरुआत में गिरफ़्तार होने के बाद, ख़बरों के मुताबिक़, अब एक सेशंस कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दे दी है।

गोमांस तस्करी का है आरोपी,वहीं भानू हिंदू ने असलम की जमानत पर आपत्ति लगाई थी

यहाँ इस केस का पूरा ब्योरा और अपडेट दिए गए हैं:

 

 केस की पृष्ठभूमि

यह विवाद 17 दिसंबर, 2025 को शुरू हुआ, जब हिंदू कार्यकर्ताओं ने भोपाल में पुलिस मुख्यालय के पास एक कंटेनर ट्रक को रोका।

 ज़ब्ती: ट्रक में 26.5 टन मांस लदा था, जिसके बीफ़ (गाय का मांस) होने का शक था।

पुष्टि: जनवरी 2026 की शुरुआत में मथुरा की एक लैब से मिली फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी कि सैंपल असल में गाय का मांस (बीफ़) ही थे।

 गिरफ़्तारी: रिपोर्ट आने के बाद, भोपाल पुलिस ने असलम कुरैशी (Livestock Food Processors Private Limited के मालिक) और ट्रक ड्राइवर शोएब को गिरफ़्तार कर लिया।

 

 मुख्य आरोप और जाँच

इस केस ने मध्य प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया:

 बूचड़खाने का दुरुपयोग: जाँचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुरैशी, जिसके पास मरे हुए जानवरों के शवों को ठिकाने लगाने का नगर निगम का ठेका था, उन शवों (ज़्यादातर गायों के) को अवैध रूप से काटने और बेचने के लिए इस्तेमाल कर रहा था।

 प्रशासनिक कार्रवाई: भोपाल नगर निगम (BMC) ने जिंसी बूचड़खाने को सील कर दिया और लापरवाही के आरोप में लगभग 12 अधिकारियों (जिनमें एक पशु चिकित्सक भी शामिल था) को निलंबित कर दिया।

SIT का गठन: ACP उमेश तिवारी की अगुवाई में एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया, ताकि पूरी सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके; आरोप है कि यह चेन मुंबई और शायद अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक फैली हुई थी।

 

मौजूदा स्थिति

जहाँ एक तरफ़ SIT और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) बड़े पैमाने पर चल रहे तस्करी रैकेट और श्रम क़ानूनों के उल्लंघन के मामले में अपनी जाँच जारी रखे हुए हैं, वहीं सेशंस कोर्ट द्वारा कुरैशी को ज़मानत देने का फ़ैसला इस केस में एक अहम क़ानूनी मोड़ साबित हुआ है। आलोचकों ने पहले इस केस के शुरुआती चरणों में “संदिग्ध जल्दबाज़ी” की ओर इशारा किया था, जबकि बचाव पक्ष ने शायद गिरफ़्तारी की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं और सबूतों की प्रकृति पर अपना ज़ोर दिया है।

 

लेकिन दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार जैन की कोर्ट ने 35 हजार रुपए के बांड पर जमानत आदेश पारित कर दिए

बता दें कि असलम को लोअर कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उसके एडवोकेट ने सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई थी

जिस पर आज कोर्ट में सुनवाई हुई थी,वकील ने हैदराबाद की रिपोर्ट न आने का हवाला दिया

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