अंतरिक्ष की दुनिया में ईरान की बड़ी उपलब्धि: स्वदेशी सैटेलाइट और लॉन्च रॉकेट विकसित करने वाले देशों में शामिल

🇮🇳 ख़बर भारत की-8 नवंबर,2026, तेहरान। ईरान |
ईरान ने स्वदेशी सैटेलाइट और लॉन्च रॉकेट विकसित करने की क्षमता हासिल की। जानिए ओमिद, नूर और 2026 के नए अंतरिक्ष मिशनों की पूरी कहानी।
तेहरान | ईरान | 8 नवंबर 2026 | ख़बर भारत की
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में ईरान ने अपनी तकनीकी क्षमता का विस्तार किया है। देश ने स्वदेशी उपग्रहों के डिजाइन, निर्माण और उन्हें अपने लॉन्च व्हीकल के जरिए कक्षा में स्थापित करने की क्षमता विकसित की है। इस उपलब्धि ने ईरान को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जो अपने स्तर पर उपग्रह और उन्हें अंतरिक्ष में भेजने वाली तकनीक विकसित कर सकते हैं।
ईरान का अंतरिक्ष कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। देश ने अपने इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालयों की मदद से उपग्रहों के निर्माण और उन्हें अंतरिक्ष में स्थापित करने की तकनीक विकसित की है। हालांकि, एक जरूरी तथ्य यह है कि ईरान के सभी उपग्रह घरेलू रॉकेट से लॉन्च नहीं हुए हैं—कुछ मिशनों में रूस की मदद भी ली गई है।

2009 में मिली थी पहली बड़ी सफलता
ईरान के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में हुई थी। वर्ष 2009 में ईरान ने अपने स्वदेशी उपग्रह ‘ओमिद’ को अपने ही बनाए ‘सफीर’ रॉकेट से अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया। यह उसके अंतरिक्ष इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव था।
इसके बाद ईरान ने रिमोट सेंसिंग, संचार और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए कई उपग्रह विकसित किए। वर्ष 2020 में ‘नूर-1’ उपग्रह को स्वदेशी कासेद रॉकेट से लॉन्च किया गया।
2026 में भी जारी है अंतरिक्ष कार्यक्रम का विस्तार
ईरान के अंतरिक्ष कार्यक्रम में 2026 के दौरान भी कई गतिविधियां सामने आई हैं। फरवरी 2026 में ‘जाम-ए-जाम 1’ संचार उपग्रह को रूस के प्रोटॉन-एम रॉकेट से कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से लॉन्च किया गया। यह मिशन रूस के साथ सहयोग से पूरा हुआ।
इसके अलावा ईरान के अंतरिक्ष अधिकारियों ने कई नए संचार और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों पर काम जारी रहने की जानकारी दी है। इनमें नाहिद-3, पार्स-2 और राड-1 जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।
आम लोगों के लिए क्या है इसका फायदा?
सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल केवल अंतरिक्ष अनुसंधान तक सीमित नहीं है।
इसके कई व्यावहारिक उपयोग हैं:
– संचार: दूरदराज के इलाकों में संचार सेवाओं को बेहतर बनाना।
– मौसम पूर्वानुमान: मौसम की गतिविधियों और संभावित प्राकृतिक आपदाओं पर नजर रखना।
– कृषि: फसलों, जल संसाधनों और जमीन की स्थिति का अध्ययन करना।
– पर्यावरण: जंगलों, जलाशयों और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी।
– आपदा प्रबंधन: बाढ़, जंगल की आग और अन्य आपदाओं के दौरान जानकारी जुटाना।
चुनौतियां भी कम नहीं
ईरान ने स्वदेशी रॉकेट और उपग्रह तकनीक में प्रगति की है, लेकिन उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम को तकनीकी चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना भी करना पड़ता है। कुछ महत्वपूर्ण उपग्रह मिशनों के लिए उसे रूस जैसे देशों के लॉन्च सिस्टम का सहारा लेना पड़ा है।
ईरान की अंतरिक्ष यात्रा यह दिखाती है कि वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी शिक्षा और लगातार प्रयास से कोई देश अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी स्वतंत्र क्षमता विकसित कर सकता है। आने वाले वर्षों में उसके नए उपग्रह और लॉन्च व्हीकल प्रोजेक्ट इस प्रगति की असली परीक्षा होंगे।
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