अभिनेता विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने की राह पर: कांग्रेस के बाद TVK को CPI और CPI(M) का भी समर्थन मिला, VCK भी तैयार; 118 विधायकों से पूर्ण बहुमत पूरा।

8 मई, 2026 की रिपोर्ट के आधार पर अभिनेताराजनेता विजय की पार्टी, ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) ने 234 सदस्यों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आँकड़ा छूने के लिए ज़रूरी समर्थन हासिल कर लिया है।
TVK का अकेले का प्रदर्शन: 23 अप्रैल, 2026 को हुए विधानसभा चुनावों में TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने 107–108 सीटें जीतीं (विजय ने खुद दो सीटें जीतीं; इसे ध्यान में रखते हुए पार्टी की प्रभावी संख्या अक्सर 107 बताई जाती है)। यह संख्या बहुमत के लिए ज़रूरी 118 सीटों से कम थी।
हासिल किया गया समर्थन:
कांग्रेस: 5 विधायक (समर्थन देने वाली पहली पार्टी)।
VCK (विदुथलाई चिरुथैगल काची): 2 विधायक।
CPI: 2 विधायक (बिना किसी शर्त के समर्थन)।
CPI(M): 2 विधायक (बिना किसी शर्त के समर्थन)।
कुल: इस समर्थन के साथ, TVK के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास अब ठीक 118 विधायक हो गए हैं, जो बहुमत के आँकड़े को पूरा करता है।

उम्मीद है कि विजय जल्द ही राज्यपाल (राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर) से मिलकर औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इससे पहले, राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए और अधिक स्पष्ट प्रमाण माँगे थे, जिसके कारण प्रक्रिया में कुछ देरी हुई थी।
2026 के चुनाव
TVK के ज़ोरदार चुनावी पदार्पण ने तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही DMK-AIADMK की दोध्रुवीय राजनीति को पूरी तरह बदल दिया:
TVK: ~108 सीटें
DMK: ~59 सीटें
AIADMK: ~47 सीटें
अन्य (जिनमें कांग्रेस, वामपंथी दल, VCK, PMK आदि शामिल हैं): शेष सीटें
खंडित जनादेश के बाद, सरकार बनाने को लेकर बातचीत का दौर काफी तेज़ और गहमागहमी भरा रहा। कांग्रेस जैसे छोटे दलों ने DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन से किनारा कर लिया, जबकि वामपंथी दलों और VCK (जो पहले DMK के सहयोगी थे) ने एक “धर्मनिरपेक्ष” सरकार बनाने के लिए TVK को समर्थन देने का फ़ैसला किया।
यह एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत है; यदि राज्यपाल विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं और वे सदन में अपना बहुमत (Floor Test) साबित कर देते हैं (या अन्य औपचारिकताओं को पूरा कर लेते हैं), तो उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है।
राजनीतिक घटनाक्रम अभी भी जारी है, और आने वाले समय में इसमें और भी नए मोड़ आ सकते हैं; विपक्षी दल इसे लेकर कानूनी दाँवपेच अपना सकते हैं या इसे चुनौती दे सकते हैं।

विजय की TVK राजनीतिक विचारधारा
TVK (तमिलगा वेट्री कझगम) की राजनीतिक विचारधारा को मुख्य रूप से “धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय” के रूप में वर्णित किया जाता है, जिसे केंद्र-वाम (centre-left) स्थिति में रखा गया है।
मुख्य विचारधारा
धर्मनिरपेक्षता: सांप्रदायिक सद्भाव पर ज़ोर, सभी धर्मों को समान मानना और व्यक्तिगत आस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप न करना। पार्टी दक्षिणपंथी/BJP की राजनीति के साथ किसी भी गठबंधन या संबंध को अस्वीकार करती है और खुद को धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करती है।
सामाजिक न्याय और समतावाद: हाशिए पर पड़े वर्गों के उत्थान पर ध्यान केंद्रित करना, जाति, धर्म, लिंग, भाषा या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी के लिए समान अधिकार और अवसर सुनिश्चित करना। यह पेरियार (सामाजिक सुधार और तर्कवाद), बी.आर. अंबेडकर (संवैधानिक समानता और दलित अधिकार), और के. कामराज (शिक्षा और जन कल्याण) से प्रेरणा लेती है।
लोकतंत्र और जन-केंद्रित राजनीति: सहभागी लोकतंत्र, भ्रष्टाचार-मुक्त शासन (“ईमानदार प्रशासन”), और सत्ता के दुरुपयोग का विरोध करने के प्रति प्रतिबद्धता। इसका नारा/दृष्टिकोण अक्सर “हर किसी को सब कुछ मिलना चाहिए” होता है, जो समावेशी विकास और कल्याण पर ज़ोर देता है।
अन्य तत्व: द्वि-भाषा नीति का समर्थन (द्रविड़ संदर्भ में आमतौर पर तमिल + अंग्रेज़ी/हिंदी का विरोध), तमिल पहचान/संस्कृति का संरक्षण, राज्य की स्वायत्तता, महिला सशक्तिकरण, और युवाओं पर केंद्रित विकास।
राजनीतिक स्थिति
भारतीय संदर्भ में TVK को केंद्र-वाम (centre-left) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह मोटे तौर पर द्रविड़ संवेदनाओं (तमिल गौरव, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता) के दायरे में काम करती है, लेकिन खुद को स्थापित DMK-AIADMK के एकाधिकार के एक “गैर-पारंपरिक” या ताज़ा विकल्प के रूप में प्रस्तुत करती है, और सभी पक्षों की वंशवादी राजनीति तथा भ्रष्टाचार की आलोचना करती है।
इसका घोषणापत्र किसानों, महिलाओं, युवाओं, मछुआरों और MSME के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर ज़ोर देता है, साथ ही शासन सुधारों (जैसे, AI-संचालित प्रशासन) और भ्रष्टाचार-विरोधी उपायों पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
विजय थलपति ने जो वादा लोगों से किया –

TVK द्रविड़-प्रेरित सामाजिक न्याय को व्यापक धर्मनिरपेक्ष, समतावादी और कल्याण-उन्मुख सिद्धांतों के साथ मिश्रित करती है। यह चरम वैचारिक लेबल से बचती है, लेकिन सामाजिक मुद्दों पर केंद्र-वाम मूल्यों के साथ तालमेल बिठाती है, और साथ ही स्वच्छ, जन-केंद्रित शासन का वादा करती है। “धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय” के इस ढांचे ने इसे 2026 के बाद के चुनावी परिदृश्यों में कांग्रेस, वामपंथी दलों (CPI, CPI(M)) और VCK से समर्थन आकर्षित करने में मदद की।



