अमेरिका जंग ईरान- ईरान का रुख: ईरान ने कहा है कि पाकिस्तान में ईरानी प्रतिनिधिमंडल भेजने का कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है, जबकि US ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी जारी रखी है।

US-Iran War LIVE Hegseth Says American Forces Are 'Locked & Loaded' to Resume Strikes on Iran Europe Faces 6-Day Jet Fuel Deadline

19 अप्रैल, 2026,US का रुख: राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि एक उच्च-स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल (जिसका नेतृत्व कथित तौर पर उपराष्ट्रपति JD Vance कर रहे हैं, और जिसमें Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे दूत भी शामिल हैं) सोमवार को वार्ता के एक नए दौर के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद जाएगा। इस वार्ता का मकसद संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाना या उसे अंतिम रूप देना है। मौजूदा दो हफ़्ते का संघर्ष-विराम लगभग 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है।

– ईरान का रुख: ईरान के सरकारी मीडिया (जिसमें Tasnim News Agency भी शामिल है) ने कहा है कि पाकिस्तान में ईरानी प्रतिनिधिमंडल भेजने का कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है, जबकि US ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी जारी रखी है। तेहरान इस घेराबंदी को और US की उन मांगों को, जिन्हें वह “अत्यधिक” (maximalist) मांगें कहता है (जिनमें उसके परमाणु कार्यक्रम और Strait of Hormuz से जुड़ी मांगें शामिल हैं), अस्वीकार्य शर्तें मानता है। ईरान ने US पर विरोधाभासी संदेश देने और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

– Strait of Hormuz को लेकर तनाव: ईरान ने फिर से कुछ पाबंदियां लगा दी हैं (जिन्हें कुछ रिपोर्टों में प्रभावी रूप से बंद करने या आवा-जाही को “असंभव” बनाने जैसा बताया गया है), जिसे US संघर्ष-विराम का उल्लंघन मानता है। ट्रंप ने ईरान पर “थोड़ी होशियारी दिखाने” और जहाज़ों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया है।

 

ट्रंप की चेतावनियां

ट्रंप ने अपनी बयानबाज़ी में काफ़ी तीखा और आक्रामक रुख अपनाया है:

– उन्होंने आने वाली वार्ताओं को किसी समझौते के लिए ईरान का “आखिरी मौका” बताया है—यानी समझौता “अच्छे तरीके से” हो जाए।

– अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो उन्होंने फिर से भारी हमले करने की धमकी दी है, जिसमें बिजली संयंत्रों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को नष्ट करना शामिल है। कुछ रिपोर्टों में उन्होंने इसे देश के कुछ हिस्सों को “उड़ा देने” जैसा बताया है, या चेतावनी दी है कि अगर ईरान US की शर्तों पर हस्ताक्षर नहीं करता है, तो “पूरा देश तबाह हो जाएगा।”

– उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया है कि समझौता “किसी न किसी तरह होकर रहेगा—चाहे अच्छे तरीके से हो या सख़्त तरीके से।” साथ ही, उन्होंने यह भी साफ़ किया है कि जब तक कोई व्यापक समझौता नहीं हो जाता, तब तक US की नौसैनिक घेराबंदी जारी रहेगी। यह 2025-2026 के संकट के शुरुआती दौर के पैटर्न से मेल खाता है, जब ट्रंप ने कड़े अल्टीमेटम (नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की धमकियों सहित) का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया, जिसके बाद ईरान द्वारा जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों को थोड़े समय के लिए फिर से खोलने के बाद अस्थायी युद्धविराम हुआ।

 

भविष्य की संभावनाएँ

  • पाकिस्तान में प्रत्यक्ष वार्ता का पहला दौर (पिछले सप्ताहांत) 20 घंटे से अधिक चला लेकिन बिना किसी सफलता के समाप्त हो गया। परमाणु मुद्दों, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय प्रॉक्सी पर मतभेद बने हुए हैं।
  •  पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, उसके अधिकारी दोनों पक्षों से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन आपसी आरोपों को देखते हुए सफलता अनिश्चित है।
  • दोनों पक्षों के पास युद्ध को पूरी तरह से फिर से शुरू होने से रोकने के लिए प्रोत्साहन हैं: आर्थिक लागत (तेल बाजार), क्षेत्रीय जोखिम और सैन्य थकान। हालांकि, विश्वास का स्तर कम है, और युद्धविराम नाजुक स्थिति में है।

 

 

संक्षेप में,इस गंभीर और तनावपूर्ण स्थिति को सटीक रूप से दर्शाता है—ईरान ने अभी तक प्रतिनिधिमंडल भेजने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है, और ट्रंप स्पष्ट विनाश की धमकियों के साथ अधिकतम दबाव डाल रहे हैं—लेकिन फिर भी अमेरिका राजनयिक संपर्क को खुला रखते हुए अपना दल पाकिस्तान भेज रहा है।

 

स्थिति तेजी से बदल रही है और अगले 48-72 घंटों में जो भी होगा, उसके आधार पर इसमें तेजी से बदलाव आ सकता है। तनाव बढ़ना या अंतिम समय में समझौता होना, दोनों ही संभव हैं।

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