ईरान ने अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत (जिसमें पाकिस्तान और कतर जैसे देशों ने मध्यस्थता की) के दौरान अपनी बातचीत सलाहकार टीम में दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया।

ईरान ने अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत (जिसमें पाकिस्तान और कतर जैसे देशों ने मध्यस्थता की) के दौरान अपनी बातचीत सलाहकार टीम में दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया। इसका मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस व्यवहार को बेहतर ढंग से संभालना था जिसे ईरानी अधिकारियों ने “अस्थिर व्यवहार” (erratic behavior) बताया था, और उसी के अनुसार संदेश तैयार करना था।
रिपोर्ट की मुख्य बातें:
ये मनोवैज्ञानिक अप्रैल 2026 में इस्लामाबाद में शुरुआती बातचीत के बाद शामिल हुए, जब दोनों पक्षों ने संभावित समझौते (दुश्मनी खत्म करने से संबंधित, जिसमें नौसैनिक कार्रवाई और परमाणु/प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे शामिल थे) के लिए शर्तों का आदान-प्रदान किया।
एक अज्ञात ईरानी अधिकारी (जिसे सार्वजनिक रूप से बोलने की अनुमति नहीं थी) ने बताया: “हमने बातचीत के सलाहकार समूह में दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया ताकि हम राष्ट्रपति ट्रंप के लिए संदेशों को उस नज़रिए से तैयार कर सकें जिससे उनके उस व्यवहार पैटर्न को संभाला जा सके जिसे हम ‘साइकोपैथिक’ (मनोविकृत) मानते हैं।”
खबरों के अनुसार, मध्यस्थों के ज़रिए भेजे जाने से पहले वे संदेशों के ड्राफ्ट की समीक्षा करते थे। अधिकारी ने दावा किया कि उनकी सलाह को शामिल करने के बाद ट्रंप की “प्रतिक्रियाओं में काफी सुधार” हुआ है।
यह एक अज्ञात ईरानी अधिकारी की सिंगल-सोर्स रिपोर्टिंग (एक ही स्रोत से मिली जानकारी) है, इसलिए इसे सावधानी से देखा जाना चाहिए—संवेदनशील राजनयिक लीक के मामले में ऐसा होना आम बात है, लेकिन इसकी पुष्टि अमेरिका या अन्य ईरानी अधिकारियों ने नहीं की है।
यह उन व्यापक अप्रत्यक्ष वार्ताओं का हिस्सा है जिनके बारे में खबर है कि वे एक शुरुआती युद्धविराम (जिसकी घोषणा लगभग 15 जून 2026 को हुई थी, और औपचारिक हस्ताक्षर संभवतः जिनेवा में होने थे) की ओर ले जा रही हैं।
ऑनलाइन प्रतिक्रियाएं मज़ाक उड़ाने (“साइकोपैथिक” बताए जाने पर सवाल उठाने) से लेकर बातचीत की रणनीतियों पर चर्चा करने तक हैं। कई राजनयिक और टीमें अनौपचारिक रूप से अपने समकक्षों के तौर-तरीकों का विश्लेषण करती हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिकों को स्पष्ट रूप से शामिल करना एक असामान्य बात मानी जा रही है।
अहम बातचीत में इस तरह की मनोवैज्ञानिक प्रोफाइलिंग का इतिहास में उदाहरण मिलता है, लेकिन यहाँ इसे जिस तरह से सार्वजनिक रूप से पेश किया गया है, वह उल्लेखनीय है।
