एफसीआरए संशोधन विधेयक पर संसद की बड़ी पहल: 31 सदस्यीय जेपीसी गठित, संजय जायसवाल संभालेंगे कमान

ख़बर भारत की 08 सितम्बर 2026-नई दिल्ली।
लोकसभा के आधिकारिक बुलेटिन में नाम जारी; दोनों सदनों के सांसदों को मिली जगह, शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने की तैयारी।
नई दिल्ली। विदेशी अंशदान के नियमन से जुड़े विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर संसद ने अब महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। विधेयक की विस्तृत समीक्षा और जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन कर दिया गया है। समिति की अध्यक्षता बिहार के बेतिया से भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल करेंगे।
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बुलेटिन-भाग दो, संख्या 6114 से 6116, दिनांक 3 सितंबर 2026 में समिति के गठन, सदस्यों की सूची और अध्यक्ष की नियुक्ति से संबंधित आधिकारिक जानकारी दी गई है। बुलेटिन के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने डॉ. संजय जायसवाल को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर गठित संयुक्त संसदीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य
31 सदस्यीय JPC में 21 सदस्य लोकसभा और 10 सदस्य राज्यसभा से शामिल किए गए हैं। समिति की संरचना में सत्ता पक्ष के साथ विभिन्न विपक्षी और क्षेत्रीय दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इनमें कांग्रेस, जनता दल (यूनाइटेड), तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, आईयूएमएल, शिवसेना, एनसीपी (शरदचंद्र पवार), एनसीपी और टीडीपी सहित कई दलों के सांसद शामिल हैं।
लोकसभा से समिति में डॉ. संजय जायसवाल के अलावा भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, कमलेश जांगड़े, मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल, निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम, अनंत नायक और अरविंद धर्मापुरी सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।
विपक्ष की ओर से एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मोहम्मद हमदुल्लाह सईद, कालीचरण मुंडा, जिया उर रहमान, कल्याण बनर्जी, ए. राजा, लावु श्री कृष्ण देवरायलु, नरेश गणपत म्हास्के, कौशलेंद्र कुमार, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर को समिति में जगह मिली है।
राज्यसभा से सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देवरा निकम, अलका गुर्जर, सतपाल शर्मा, प्रफुल्ल पटेल, संजय कुमार झा, क्रिस्टोफर मैनिकम, मेनका गुरुस्वामी और पी. विल्सन समिति के सदस्य हैं।

12 अगस्त को JPC के पास भेजा गया था विधेयक
FCRA संशोधन विधेयक को संसद ने 12 अगस्त 2026 को संयुक्त समिति के पास भेजने का निर्णय लिया था। विधेयक को लेकर विपक्ष ने कई प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए इसे अल्पसंख्यकों और NGOs के लिए चिंता का विषय बताया था। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रस्तावित कानून किसी धर्म या समुदाय को लक्षित नहीं करता, बल्कि विदेशी अंशदान के नियमन और निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है।
अब होगी प्रावधानों की गहन पड़ताल
JPC के गठन के साथ विधेयक अब केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं रहेगा, बल्कि इसके प्रावधानों की संसदीय स्तर पर विस्तृत जांच, सुझाव और संभावित संशोधनों की प्रक्रिया शुरू होगी।
रिपोर्ट के अनुसार समिति को अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में प्रस्तुत करनी है।
संजय जायसवाल के सामने बड़ी जिम्मेदारी
समिति की अध्यक्षता डॉ. संजय जायसवाल को सौंपे जाने को इस पूरी संसदीय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है। अब उनके नेतृत्व में 31 सदस्यीय समिति विधेयक के प्रस्तावित प्रावधानों की समीक्षा करेगी और विभिन्न राजनीतिक दलों तथा संबंधित पक्षों के विचारों को सामने रखकर व्यापक चर्चा करेगी।
विदेशी अंशदान विनियमन कानून का सीधा प्रभाव देश में विदेश से धन प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों, न्यासों, संस्थाओं और अन्य संगठनों पर पड़ता है। ऐसे में संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट विधेयक के अंतिम स्वरूप को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विदेशी धन, पारदर्शिता और राष्ट्रीय हित पर संसद की नजर
विदेशी अंशदान से जुड़े कानून में बदलाव की यह कवायद केवल कानूनी संशोधन तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में विदेशी धन के स्रोत, उसके उपयोग, संस्थाओं की जवाबदेही और राष्ट्रीय हित जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।
अब संयुक्त संसदीय समिति के सामने चुनौती यह होगी कि विदेशी धन के नियमन में पारदर्शिता और सख्ती के साथ-साथ वैध सामाजिक एवं जनहितकारी गतिविधियों के लिए आवश्यक स्थान के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
यही वजह है कि संयुक्त संसदीय समिति की आगामी सिफारिशों पर सरकार, विपक्ष, गैर-सरकारी संगठनों और विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाली संस्थाओं—सभी की नजरें टिकी हैं। समिति की रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि विदेशी अंशदान के नियमन की प्रस्तावित व्यवस्था आगे किस स्वरूप में संसद के सामने आती है।
लेखक परिचय
सुमित मिश्र
अधिवक्ता, पत्रकार व लेखक।


