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चीन ने बिना पूंछ वाले जेट की बेहतरीन गतिशीलता (maneuverability) का प्रदर्शन करके छठी पीढ़ी के फाइटर जेट के विकास में एक बड़ी बाधा को पार कर लिया है।

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चीन ने बिना पूंछ वाले जेट की बेहतरीन गतिशीलता (maneuverability) का प्रदर्शन करके छठी पीढ़ी के फाइटर जेट के विकास में एक बड़ी बाधा को पार कर लिया है।

यह चीन के छठी पीढ़ी के फाइटर प्रोग्राम में हाल की प्रगति को दिखाती है।

 

चीन *बिना पूंछ वाले प्रोटोटाइप* (tailless prototypes) का परीक्षण कर रहा है, खासकर *चेंगदू J-36* (एक भारी, तीन-इंजन वाला, डायमंड/डबल-डेल्टा विंग डिज़ाइन)। नए फुटेज में इसे तेज़ी से मुड़ने और ऊपर चढ़ने (sharp turn-climb maneuver) का करतब करते हुए दिखाया गया है। इससे उन पुरानी चिंताओं का समाधान होता है कि बिना पूंछ वाले विमानों में पिच कंट्रोल, स्थिरता और तेज़ी से दिशा बदलने के लिए हॉरिजॉन्टल टेलप्लेन (horizontal tailplanes) नहीं होते।

 

डिज़ाइन की चुनौतियों से पार पाना: बिना पूंछ वाले कॉन्फ़िगरेशन स्टील्थ (कम रडार-रिफ्लेक्टिंग सतहें, बेहतर प्लानफॉर्म अलाइनमेंट) में तो बेहतरीन होते हैं, लेकिन आम तौर पर उन्हें मुड़ने-घूमने (maneuverability) में मुश्किल होती है। इसकी भरपाई के लिए चीन एडवांस्ड फ़्लाइट-कंट्रोल सॉफ़्टवेयर, विंग-इंटीग्रेटेड कंट्रोल सरफ़ेस (जैसे एलेवॉन) और संभवतः थ्रस्ट वेक्टरिंग का इस्तेमाल करता है।

प्रगति: चेंगदू डिज़ाइन के चार फ़्लाइट प्रोटोटाइप की जानकारी मिली है। 2024 के आखिर में पहली सार्वजनिक फ़्लाइट टेस्टिंग के साथ यह दुनिया का पहला उड़ने वाला छठी पीढ़ी का प्रोटोटाइप बन गया। चीन के पास बिना पूंछ वाले विमानों के लिए अन्य प्रोजेक्ट भी हैं (जैसे शेनयांग J-50/J-XDS)।

हालिया झलक: Y-20 ट्रांसपोर्ट विमान की सालगिरह के लिए PLA के एक वीडियो में बिना पूंछ वाले विमान की एक झलक (जिसे “लिटिल सिक्स” उपनाम दिया गया है) दिखाई दी, जिससे आधिकारिक संकेत मिला।

 

यह छठी पीढ़ी की खूबियों, जैसे बेहतर स्टील्थ, लंबी रेंज/लोइटर क्षमता (ट्राईजेट लेआउट की मदद से), सेंसर फ़्यूज़न और मानव-मानवरहित टीमिंग (manned-unmanned teaming) के लिए एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि है।

 

प्रोटोटाइप में चीन की बढ़त: चीन एकमात्र ऐसा देश है जिसके बारे में पुष्टि हुई है कि उसने अब तक उच्च-मैन्युवरेबिलिटी वाले छठी पीढ़ी के बिना पूंछ वाले फाइटर विमान उड़ाए हैं। कई प्रोटोटाइप तेज़ी से विकसित हो रहे हैं।

अमेरिकी प्रोग्राम (F-47/NGAD): बोइंग ने 2025 में कॉन्ट्रैक्ट जीता। पहली उड़ान का लक्ष्य ~2028 रखा गया है, और 2030 के दशक की शुरुआत में ऑपरेशनल क्षमता मिलने की उम्मीद है (कुछ अनुमानों के अनुसार इसमें और समय लग सकता है)। इसमें भी एडवांस्ड स्टील्थ (संभवतः बिना पूंछ वाले तत्व) होने की उम्मीद है, लेकिन इसे विकास के सामान्य समय और बजट की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

छठी पीढ़ी के व्यापक लक्ष्य (दोनों पक्षों के लिए): हर तरह से स्टील्थ (छिपने की क्षमता), अडैप्टिव इंजन, AI, डायरेक्टेड एनर्जी, कुछ कॉन्सेप्ट में हाइपरसोनिक स्पीड और लॉयल विंगमैन ड्रोन।

 

ध्यान देने वाली बातें: बहुत सी जानकारी अभी भी गुप्त रखी गई है। यहाँ “हाई मैन्यूवरेबिलिटी” (तेज़ी से मुड़ने या दिशा बदलने की क्षमता) का मतलब शायद 4थी पीढ़ी के जेट की तरह डॉगफाइटिंग (हवा में आमने-सामने की लड़ाई) के बजाय, अपने रोल (जैसे लंबी दूरी का स्टील्थ प्लेटफ़ॉर्म या “उड़ता हुआ हथियार-घर”) के हिसाब से ज़रूरी फुर्ती है। असल लड़ाई में परफॉर्मेंस इंजन, मटीरियल, सेंसर और इंटीग्रेशन पर निर्भर करती है—और इन क्षेत्रों में अभी भी टेस्टिंग चल रही है। दावों को रणनीतिक संकेत और अधूरी सार्वजनिक जानकारी के नज़रिए से देखा जाना चाहिए।

 

चीन की तरक्की अमेरिका और चीन के बीच हवाई ताकत की कड़ी प्रतिस्पर्धा को दिखाती है, जिसका असर प्रशांत क्षेत्र में होने वाले ऑपरेशन्स पर पड़ेगा। इस तरह के प्रोग्राम आमने-सामने की लड़ाई (टर्निंग फाइट्स) के बजाय स्टील्थ, रेंज और नेटवर्क-आधारित युद्ध पर ज़ोर देते हैं।

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