पाकिस्तान-अमेरिका की धरती के लिए सबसे बड़ा परमाणु ख़तरा-अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ़ तुलसी गब्बार्ड..पाकिस्तान-अगर अमेरिका हमला करता है, तो हम मुंबई और दिल्ली पर हमला करेंगे।

21 मार्च, 2026 ,यह ख़बर इस्लामाबाद,वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच हुई एक बहुत ही तनावपूर्ण बातचीत का नतीजा हैं।

1. “अमेरिकी हमले” का संदर्भ”

यह तनाव तब शुरू हुआ, जब अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ़ तुलसी गब्बार्ड ने हाल ही में सीनेट के सामने गवाही देते हुए पाकिस्तान को अमेरिका की धरती के लिए सबसे बड़ा परमाणु ख़तरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ऐसी मिसाइल डिलीवरी प्रणालियाँ विकसित कर रहा है, जिनका मक़सद ख़ास तौर पर अमेरिका को अपनी मारक सीमा में लाना है।

 

2.पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

इसके जवाब में, पाकिस्तान के पूर्व राजनयिकों (जिनमें जलील अब्बास जिलानी और अब्दुल बासित शामिल हैं) और मौजूदा अधिकारियों, जैसे ताहिर हुसैन अंद्राबी, ने अपनी बात ज़ोरदार ढंग से रखी है।

अब्दुल बासित 2014 से 2017 तक भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर रहे थे।बासित एक सेवानिवृत्त पाकिस्तानी राजनयिक हैं जिन्होंने भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया । उन्हें 2014 में इस पद पर नियुक्त किया गया था और वे नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में तैनात थे। इससे पहले, उन्होंने मई 2012 से मार्च 2014 तक जर्मनी में पाकिस्तान के राजदूत के रूप में कार्य किया। अपने करियर के दौरान, वे मॉस्को , न्यूयॉर्क , सना , जिनेवा और लंदन में तैनात रहे हैं ।

इस बयान के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा सकते हैं। खासकर तब, जब दोनों देश परमाणु ताकत रखते हैं।

उनका मुख्य तर्क यह है-

भारत-केंद्रित सिद्धांत: वे ज़ोर देकर कहते हैं कि पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम “पूरी तरह से भारत के संदर्भ में विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध (credible minimum deterrence) के सिद्धांत पर आधारित हैं।”

 “ख़तरे” पर स्पष्टीकरण: “मुंबई और दिल्ली पर हमला” करने वाली बातें इन अधिकारियों की तरफ़ से तब सामने आईं, जब वे यह समझा रहे थे कि उनके हथियार वैश्विक पहुँच के लिए नहीं, बल्कि अपने पड़ोसी देश के हिसाब से तैयार किए गए हैं। उनका तर्क है कि चूँकि उनकी मिसाइलें भारत को रोकने के लिए भारतीय शहरों (जैसे दिल्ली और मुंबई) पर हमला करने के हिसाब से बनाई गई हैं, इसलिए उनसे अमेरिका को कोई ख़तरा नहीं है।

 

3. क्षेत्रीय तनाव के केंद्र

इस समय माहौल काफ़ी तनावपूर्ण है, जिसकी कई वजहें एक साथ सामने आ रही हैं:

 “अफ़-पाक” युद्ध: पाकिस्तान इस समय डूरंड रेखा के पास अफ़ग़ान तालिबान के साथ सीधे सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है। पाकिस्तान ने हाल ही में काबुल में हवाई हमले किए थे, जिसे भारत ने “नरसंहार” बताते हुए उसकी कड़ी निंदा की थी।

 ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025): पिछले साल भारत द्वारा किए गए एक बड़े सैन्य अभियान को लेकर अभी भी नाराज़गी बनी हुई है; इस अभियान में पहलगाम में हुए एक हमले के बाद सीमा पार मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।

 गलत सूचना फैलाने के अभियान: भारतीय इंटेलिजेंस ने हाल ही में एक सुनियोजित अभियान (जिसमें IndiaBetraysIran हैशटैग का इस्तेमाल किया गया था) का पता लगाया है; इस अभियान में यह आरोप लगाया गया था कि भारत ने इस महीने की शुरुआत में अमेरिका को एक ईरानी युद्धपोत डुबाने में मदद की थी।

 

 

हालाँकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियाँ लगातार यह चेतावनी दे रही हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच “परमाणु संघर्ष” का जोखिम दशकों में अपने उच्चतम स्तर पर बना हुआ है।

 

 

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