पूर्व राष्ट्रपति को पुस्तक भेंट करने पहुँचे अधिवक्ता-लेखक सुमित कुमार मिश्र;‘नवभारत का न्याय दर्शन’ पर हुई आत्मीय चर्चा..

ख़बर भारत की -04 सितंबर 2026-नई दिल्ली
अदालत से राष्ट्रपति भवन तक की न्याय-यात्रा के साक्षी बने रामनाथ कोविंद, ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ पर हुई आत्मीय चर्चा
पूर्व राष्ट्रपति को पुस्तक भेंट करने पहुँचे अधिवक्ता-लेखक सुमित कुमार मिश्र; वकालत के पुराने दिनों से लेकर बिहार और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ तक कई प्रसंगों ने मुलाकात को बनाया यादगार
नई दिल्ली। न्याय, संविधान और विधि के शासन पर केंद्रित पुस्तक ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ अब देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तक पहुँच गई है। अधिवक्ता, पत्रकार एवं लेखक सुमित कुमार मिश्र ने पूर्व राष्ट्रपति से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें अपनी पुस्तक की प्रति भेंट की। पुस्तक भेंट करने का यह अवसर केवल औपचारिक नहीं रहा, बल्कि कानून, वकालत, संविधान और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक पुराने प्रसंगों ने मुलाकात को विशेष बना दिया।
बातचीत के दौरान पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने वकालत के दिनों की स्मृतियाँ साझा कीं। चर्चा दिल्ली में उनके अधिवक्ता जीवन, दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उनके कार्य तथा उस दौर के कानूनी अनुभवों तक पहुँची। कोविंद ने 1971 में दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया था। वे 1977 से 1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के अधिवक्ता रहे और 1978 में सुप्रीम कोर्ट के Advocate-on-Record बने। इसके बाद 1980 से 1993 तक उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता के रूप में कार्य किया।
वकालत से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
मुलाकात में रामनाथ कोविंद की उस प्रेरणादायी यात्रा पर भी चर्चा हुई, जो कानून की दुनिया से शुरू होकर संसद, बिहार के राज्यपाल और फिर भारत के 14वें राष्ट्रपति के पद तक पहुँची। 25 जुलाई 2017 को उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली और 25 जुलाई 2022 तक इस संवैधानिक दायित्व का निर्वहन किया।
सुमित कुमार मिश्र ने कहा कि एक अधिवक्ता के रूप में कानून को करीब से समझने वाले व्यक्ति का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँचना भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और अवसरों की व्यापकता को दर्शाता है।
बिहार की पुरानी स्मृतियों ने बढ़ाई मुलाकात की आत्मीयता
मुलाकात के दौरान बिहार से जुड़ी पुरानी स्मृतियाँ भी ताजा हुईं। जब रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल थे, उस समय सुमित कुमार मिश्र की प्रभात झा जी के साथ उनसे मुलाकातें होती रही थीं। बातचीत में पुनौराधाम में मां सीता मंदिर निर्माण से जुड़ी पुरानी गतिविधियों और उस दौर के प्रयासों का भी उल्लेख हुआ।
प्रभात झा जी के साथ इस विषय को लेकर किए गए प्रयासों तथा उस समय कोविंद जी के सहयोग से जुड़े प्रसंगों को भी याद किया गया। पुनौराधाम में मंदिर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ती प्रक्रिया को उन पुराने प्रयासों और संकल्पों से जोड़कर देखा गया।

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर भी हुई चर्चा
मुलाकात में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का विषय भी चर्चा के केंद्र में रहा। संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के मुद्दे पर केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष के रूप में रामनाथ कोविंद की भूमिका पर भी विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान चुनाव सुधार, लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ।
न्याय केवल अदालत तक सीमित नहीं
सुमित कुमार मिश्र की पुस्तक ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ न्याय को केवल अदालतों और कानूनी धाराओं के दायरे में नहीं देखती, बल्कि उसे भारतीय समाज, संविधान, शासन और राष्ट्र-निर्माण से जोड़कर समझने का प्रयास करती है।
पुस्तक में भारतीय न्याय परंपरा, संवैधानिक मूल्य, नागरिक अधिकार एवं कर्तव्य, विधि का शासन और आम नागरिक तक न्याय की पहुँच जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है। वहीं रामनाथ कोविंद के सार्वजनिक जीवन में भी वंचित और कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुँच का विषय महत्वपूर्ण रहा है। वकालत के दौरान उन्होंने Free Legal Aid Society के माध्यम से गरीबों और महिलाओं सहित जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में योगदान दिया था।
एक पुस्तक, दो न्याय-यात्राएँ
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ भेंट करने का अवसर इसलिए भी उल्लेखनीय रहा कि पुस्तक और उनके सार्वजनिक जीवन के केंद्र में एक साझा विचार दिखाई देता है—न्याय और संविधान।
एक ओर अदालतों में अधिवक्ता के रूप में कानून की पैरवी करने से शुरू हुई रामनाथ कोविंद की यात्रा राष्ट्रपति भवन तक पहुँची, वहीं दूसरी ओर ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ न्याय की अवधारणा को संविधान से समाज और आम नागरिक तक ले जाने का वैचारिक प्रयास करती है।
इस आत्मीय मुलाकात ने कानून और संविधान से जुड़े अनुभवों के साथ पुरानी स्मृतियों और राष्ट्र के भविष्य से जुड़े विचारों को भी एक मंच पर ला दिया। ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ की प्रति का पूर्व राष्ट्रपति के हाथों तक पहुँचना लेखक सुमित कुमार मिश्र के लिए भी एक भावनात्मक और स्मरणीय क्षण बन गया।



