बड़ी खबर | न इंजीनियरिंग की डिग्री, न तकनीकी ट्रेनिंग! उत्तराखंड के युवक ने 13 साल की मेहनत से बनाई उड़ने वाली कार

🔴 🇮🇳 ख़बर भारत की-22 अक्टूबर 2026,अल्मोड़ा । उत्तराखंड।
उत्तराखंड के रवि टम्टा ने 13 साल तक खुद सीखने और प्रयोग करने के बाद इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार का प्रोटोटाइप बनाया है।
अल्मोड़ा, उत्तराखंड। कहते हैं कि अगर कुछ नया करने का जुनून हो, तो मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक पहुंचा सकते हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले रवि टम्टा ने अपनी मेहनत और तकनीकी प्रयोगों से इस बात की मिसाल पेश की है। रवि ने बिना औपचारिक इंजीनियरिंग की डिग्री के इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार का प्रोटोटाइप तैयार किया है।
🚁 क्या है फ्लाइंग कार की खासियत?
रवि टम्टा द्वारा विकसित इस वाहन का नाम HAPIDA SKYNeX है। यह एक सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल है, जिसे बैटरी से चलने वाले कई इलेक्ट्रिक मोटर्स और प्रोपेलर्स की मदद से उड़ने के लिए डिजाइन किया गया है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे हेलीकॉप्टर और मल्टी-रोटर ड्रोन की तरह बिना पारंपरिक रनवे के सीधे ऊपर उड़ान भरने और नीचे उतरने के लिए तैयार किया गया है।
📚 इंटरनेट से सीखा, 13 साल तक किया प्रयोग
रवि टम्टा ने कला संकाय से स्नातक यानी BA की पढ़ाई की है। उनके पास औपचारिक इंजीनियरिंग शिक्षा नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी, स्वयं अध्ययन और लगातार प्रयोगों के जरिए इस प्रोजेक्ट को विकसित किया।
उनके पिता हरीश राम मैकेनिक हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में आने-जाने की कठिनाइयों ने रवि को ऐसा वाहन बनाने के लिए प्रेरित किया, जो दुर्गम क्षेत्रों में सफर को आसान बना सके।
🏔️ पहाड़ों में सफर आसान करने का सपना
रवि का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में कम दूरी की यात्रा को आसान बनाना है। खासकर उन इलाकों में, जहां अस्पतालों तक पहुंचने के लिए लोगों को घुमावदार सड़कों से लंबा सफर तय करना पड़ता है।
भविष्य में इस तरह के वाहन का इस्तेमाल चिकित्सा आपातकाल और दुर्गम क्षेत्रों में परिवहन के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए तकनीकी विकास और सुरक्षा मानकों को पूरा करना जरूरी होगा।
⚠️ क्या आम लोग अभी इस फ्लाइंग कार से सफर कर सकेंगे?
रिपोर्ट्स के अनुसार, HAPIDA SKYNeX ने अगस्त 2026 में अपना परीक्षण उड़ान चरण पूरा किया। लेकिन प्रोटोटाइप का उड़ान परीक्षण सफल होना और उसका आम यात्रियों के लिए सुरक्षित होना अलग-अलग बातें हैं।
व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले वाहन की सुरक्षा, उड़ान नियंत्रण, बैटरी क्षमता और स्थिरता की आगे जांच करनी होगी। इसके साथ ही लागू विमानन नियमों के तहत जरूरी अनुमतियां भी प्राप्त करनी होंगी।
खास बात: रवि टम्टा की यह कोशिश दिखाती है कि सीखने की ललक और लगातार प्रयोग किसी नए आविष्कार की शुरुआत बन सकते हैं। अब इस प्रोटोटाइप का भविष्य आगे के परीक्षणों, तकनीकी सुधारों और नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

