मध्य-पूर्व संकट: ईरान के गैस क्षेत्र पर इज़रायल का हमला कथित तौर पर अमेरिका के साथ समन्वित था; तेहरान ने खुफिया मंत्री के मारे जाने की पुष्टि की।

ईरानी गैस फ़ील्ड पर इज़रायल का हमला US के साथ मिलकर किया गया ….
अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट Axios ने दो सीनियर इज़रायली अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर इज़रायल का हमला ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर किया गया था और उसे ट्रंप प्रशासन की मंज़ूरी भी मिली थी।
ईरान के ऊर्जा संयंत्र पर आज हमला करके इज़राइल ने एक बहुत बड़ी भूल कर दी है, जिसकी कीमत अब पूरी दुनिया को लंबे समय तक चुकानी पड़ सकती है। यह फैसला सिर्फ इज़राइल का था या इसमें अमेरिका भी शामिल था, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि यह एक बेहद गंभीर गलती है, जिसका असर विश्व स्तर पर दिखाई देगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने भी इस दावे की पुष्टि की है।
फ़ारसी खाड़ी में मौजूद यह ऑफ़शोर गैस फ़ील्ड, जिसे ईरान कतर के साथ साझा करता है, दुनिया की सबसे बड़ी ऐसी सुविधा है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने इस फ़ील्ड को निशाना बनाए जाने को — जो कतर के नॉर्थ फ़ील्ड का ही विस्तार है — एक “खतरनाक और गैर-ज़िम्मेदाराना कदम” बताया।
इराक के बिजली मंत्रालय का कहना है कि ईरान के गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले के बाद ईरान की गैस सप्लाई पूरी तरह से रुक गई है, जिससे नेशनल ग्रिड से 3,000 MW से ज़्यादा बिजली कट गई है।
ईरान ने युद्ध शुरू होने से पहले ही साफ़ कहा था कि अगर उसके किसी भी ऊर्जा संयंत्र पर हमला हुआ, तो वह खुद को पूरी तरह स्वतंत्र मानेगा कि खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए। आज के हमले के बाद ईरान ने सऊदी अरब. क़तर और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि अगले कुछ घंटों में उनके ऊर्जा संयंत्र निशाने पर हो सकते हैं, और वहाँ के लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर हटा लिया जाए।
अगर ईरान इन हमलों को शुरू करता है , और हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसमें इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.. तो इसका असर बहुत व्यापक होगा। दुनिया के लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्से को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जीवन दोनों को गहराई से प्रभावित करेगा।
अब पूरी दुनिया के सामने यह समझने का समय है कि क्षेत्रीय टकराव किस तरह तेजी से वैश्विक संकट में बदल सकता है, और इसके परिणाम कितने दूरगामी हो सकते हैं।
