मनरेगा (MGNREGA) का नया नाम -VB-G RAM G (वीबी-जी राम जी)
मनरेगा (MGNREGA) का नया नाम अब विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) या संक्षिप्त में VB-G RAM G (वीबी-जी राम जी) है।
यह बदलाव दिसंबर 2025 में संसद में पेश और लोकसभा में पास हुए नए बिल के माध्यम से हुआ है, जो पुराने महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (MGNREGA) को रिप्लेस करता है। पहले कुछ रिपोर्ट्स में “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना” का जिक्र आया था, लेकिन अंतिम बिल में नाम VB-G RAM G रखा गया।
इस नए कानून में मुख्य बदलाव:
– गारंटीड रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए गए।
– फंडिंग पैटर्न और अन्य नियमों में भी बदलाव हैं, जो विकसित भारत 2047 विजन से जुड़े हैं।
यह बदलाव विवादास्पद रहा है, क्योंकि विपक्ष ने महात्मा गांधी के नाम हटाने पर आपत्ति जताई। वर्तमान में (18 दिसंबर 2025 तक) लोकसभा से पास हो चुका है।
मनरेगा (MGNREGA) में मुख्य बदलावों की विस्तृत व्याख्या
18 दिसंबर 2025 तक, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 (संक्षिप्त में VB-G RAM G बिल) लोकसभा में पास हो चुका है। यह बिल पुराने महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (MGNREGA, 2005) को पूरी तरह रिप्लेस करता है। पहले कुछ रिपोर्ट्स में नाम “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना” का जिक्र था, लेकिन अंतिम बिल में नाम VB-G RAM G रखा गया है।
यह बदलाव विकसित भारत 2047 विजन से जुड़ा है, जिसमें ग्रामीण विकास को इंपावरमेंट, ग्रोथ, कन्वर्जेंस और सैचुरेशन पर फोकस किया गया है। पुराने MGNREGA का फोकस मुख्य रूप से “लाइवलीहुड सिक्योरिटी” था, जबकि नया बिल “प्रोस्परस एंड रेजिलिएंट रूरल भारत” बनाने पर जोर देता है।
मुख्य बदलावों की तुलना (टेबल में):
| बदलाव का क्षेत्र | पुराना MGNREGA (2005) | नया VB-G RAM G बिल (2025) | प्रभाव/कारण |
|---|---|---|---|
| नाम | महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट | विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) – VB-G RAM G | महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, जिस पर विपक्ष ने तीव्र आपत्ति जताई (इंसल्ट टू गांधीजी कहा)। सरकार का तर्क: नया फ्रेमवर्क मॉडर्न रूरल रियलिटी से मैच करता है। |
| गारंटीड रोजगार के दिन | न्यूनतम 100 दिन प्रति घरHousehold प्रति वर्ष | 125 दिन प्रति घरHousehold प्रति वर्ष | ज्यादा रोजगार के अवसर, लेकिन कृषि सीजन में काम पर पॉज लग सकता है। |
| फंडिंग पैटर्न | केंद्र: 100% मजदूरी + 75% मटेरियल (प्रैक्टिस में 90:10) | 60:40 (केंद्र:राज्य) अनुपात, सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम | राज्यों पर ज्यादा बोझ, फेडरल इंप्लिकेशंस। क्रिटिक्स: गरीब राज्यों के लिए मुश्किल। |
| काम के प्रकार | कई कैटेगरी में स्कैटर्ड वर्क्स | मुख्य रूप से 4 प्राथमिकता क्षेत्र: 1. वॉटर सिक्योरिटी (जल संरक्षण, सिंचाई आदि) 2. कोर रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़कें, पंचायत भवन आदि) 3. लाइवलीहुड से जुड़ा इंफ्रा (स्टोरेज, मार्केट आदि) 4. क्लाइमेट एडाप्टेशन (डिजास्टर रिस्क रिडक्शन) | ड्यूरेबल एसेट्स पर फोकस, सभी काम “विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक” में रिकॉर्ड होंगे। PM गति शक्ति से इंटीग्रेशन। |
| प्लानिंग और इंप्लीमेंटेशन | डिमांड-ड्रिवन (काम की मांग पर आधारित), यूनिवर्सल | सप्लाई-ड्रिवन: केंद्र राज्यवार नॉर्मेटिव अलोकेशन तय करेगा। विकसित ग्राम पंचायत प्लान्स से शुरू, GIS और डिजिटल टूल्स से मॉनिटरिंग। पीक एग्रीकल्चरल सीजन (सोइंग/हार्वेस्टिंग) में काम पर पॉज (कुल ~60 दिन)। | ज्यादा सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल, लोकल प्राथमिकताओं पर फिल्टर। क्रिटिक्स: डिमांड-बेस्ड राइट कमजोर होगा, ग्रामीण पंचायतें साइडलाइन। |
| बजट और अलोकेशन | डिमांड बेस्ड, ओपन-एंडेड | फिक्स्ड नॉर्मेटिव अलोकेशन (केंद्र तय करेगा पैरामीटर्स) | मिसयूज रोकने का तर्क, लेकिन डिमांड ज्यादा होने पर लिमिटेशन। |
| अन्य | राइट-बेस्ड, अनएम्प्लॉयमेंट अलाउंस अगर काम न मिले | तेज पेमेंट्स (DBT), बेहतर अकाउंटेबिलिटी, लेकिन कुछ राइट्स कंडीशनल | ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने का दावा, लेकिन विपक्ष: गरीबों के राइट्स छीने जा रहे। |
विवाद के मुख्य पॉइंट्स:
– विपक्ष का विरोध: कांग्रेस और अन्य पार्टियां इसे “गांधीजी का अपमान” बता रही हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कहा कि यह गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के राइट्स को कमजोर करेगा। लोकसभा में प्रोटेस्ट, वॉकआउट और डेमॉन्स्ट्रेशन हुए।
– सरकार का तर्क: MGNREGA 20 साल पुराना हो चुका है। रूरल इंडिया बदल गया (बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटलाइजेशन, डाइवर्स लाइवलीहुड्स)। नया बिल ज्यादा टार्गेटेड, अकाउंटेबल और सस्टेनेबल एसेट्स बनाएगा।
– वर्तमान स्थिति: लोकसभा पास हो चुका है (18 दिसंबर 2025)। अब राज्यसभा और राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है। अगर पास हुआ तो नया कानून लागू होगा, पुराने काम ट्रांजिशन होंगे।
यह बदलाव ग्रामीण भारत को मजबूत बनाने का दावा करता है, लेकिन फंडिंग शिफ्ट और सेंट्रलाइजेशन पर बहस जारी है।



