मप्र में “वॉटर शेड परियोजना” का होगा सोशल ऑडिट, पहली बार होगा वॉटर शेड परियोजना का ऑडिट

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मप्र में “वॉटर शेड परियोजना” का होगा सोशल ऑडिट, पहली बार होगा वॉटर शेड परियोजना का ऑडिट

 

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) का “वाटर शेड विकास परियोजना” मध्य प्रदेश में सक्रिय है, जो स्थायी जल प्रबंधन और समुदाय-संचालित दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित करता है। सामाजिक ऑडिट ऐसी परियोजनाओं में पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण तंत्र है, जैसा कि ग्वालियर में स्वर्ण रेखा नदी पुनरुद्धार परियोजना के मामले में देखा गया है, जहाँ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शहरी नियोजन और विकास को बढ़ाने के लिए सामाजिक ऑडिट में निवासियों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया हैं।

राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन की साधारण सभा में हुआ निर्णय,ग्रामीण एवं पंचायत विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने दी जानकारी उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” की प्रगति का आंकलन जमीनी स्तर पर करें।इस अवसर पर चंदेला-बुंदेला तालाबों का जीर्णोद्धार कार्यशाला प्रतिवेदन की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। मंत्री पटेल ने कहा कि वॉटर शेड परियोजनाओं के अंतर्गत क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन का कार्य अच्छा करने वाले जिलों का स्वयं भ्रमण करेंगे।मंत्री पटेल ने कहा कि वॉटर शेड परियोजनाओं के बेहतर परिणामों के लिये एनजीओ को संबद्ध करने की नीति तैयार की जाये।सॉफ्टवेयर बनाकर होगी जानकारी फीड,जल स्त्रोतों के रिचार्ज सिस्टम को बढ़ाने की कोशिशबढ़ती जनसंख्या के चलते जल स्त्रोतों पर फोकस

उन्होंने कहा कि इसमें सॉफ्टवेयर बनाकर होगी जानकारी फीड,जल स्त्रोतों के रिचार्ज सिस्टम को बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। इसके साथ ही बढ़ती जनसंख्या के चलते जल स्त्रोतों पर फोकस होगा ताकि ज्यादा से ज्यादा जल संरक्षण किया जा सके और जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन को क़ामयाब किया जा सके।

इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह, प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव पीएचई पी. नरहरि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

 

यदि “वाटर शेड परियोजना” के लिए सामाजिक ऑडिट की योजना बनाई जाती है, तो यह संभवतः एक समान ढांचे का पालन करेगी, जिसमें स्थानीय हितधारकों, विशेषज्ञों और समुदाय के सदस्यों को शामिल करके परियोजना के कार्यान्वयन, परिणामों और जल संरक्षण, सिंचाई या ग्रामीण विकास जैसे उद्देश्यों के साथ संरेखण का आकलन किया जाएगा। डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0, का लक्ष्य 49.50 लाख हेक्टेयर और वित्तीय परिव्यय 8.50 करोड़ रुपये है। 8,134 करोड़, समुदाय-संचालित दृष्टिकोणों पर जोर देता है, जिसमें जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक ऑडिट शामिल हो सकते हैं।

 

मिशन संचालक अवि प्रसाद ने बैठक में साधारण सभा के समक्ष विभिन्न एजेंडा प्रस्तुत किये। उन्होंने पीएमकेएसवाय 2.0 की प्रगति, वॉटर शेड परियोजनाओं का सोशल ऑडिट, परियोजना के प्रभावों का विश्लेषण, मिशन के संस्थागत सुदृढ़ीकरण, जीआईएस एवं एआई सुविधा विकसित करने आदि विषयों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिशन के तहत वॉटर शेड परियोजनाओं के निरीक्षण के लिये एरिया ऑफिसर मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने वॉटर शेड वर्क मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर की जानकारी भी दी।

मध्य प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 की धारा 5(54-ए) के तहत परिभाषित इन ऑडिट में स्थानीय समुदायों द्वारा नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभाव की समीक्षा करना शामिल है।

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