21 साल बाद भोपाल का ड्राफ्ट ‘मास्टर प्लान’ जारी।

ख़बर भारत की-25 सितंबर 2026,भोपाल।
21 साल बाद भोपाल का ड्राफ्ट ‘मास्टर प्लान’ जारी।
भोपाल -मास्टर प्लान लाने की अनुमति देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को रहवासी क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियाँ बंद करने की सख्त हिदायत दी है।
SCI ने मुख्यतः 5 बिंदुओं पर निर्देश जारी किए है।
22 सितंबर को हुई सुनवाई के बाद शुक्रवार को अपलोड आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने बिल्कुल स्पष्ट किया कि जो रहवासी इलाके है वहां किसी भी प्रकार की कमर्शियल गतिविधियों न हो. सीलिंग या डिमोलिशन की कार्रवाई जारी रहे।
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माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश
दि.22 /9/ 2026
17. श्री के.एम. नटराज, विद्वान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG), जो मध्य प्रदेश राज्य की ओर से उपस्थित हैं, ने प्रस्तुत किया कि इस न्यायालय ने दिनांक 05.08.2026 के आदेश द्वारा राज्य सरकार द्वारा गठित उस समिति के संबंध में प्रस्ताव/संकल्प पर रोक लगा दी थी, जिसे भोपाल शहर की मास्टर प्लान से संबंधित कुछ मुद्दों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए गठित किया गया था। तथापि, पुनर्विचार के पश्चात राज्य सरकार ने उक्त संकल्प तथा समिति के गठन के प्रस्ताव को वापस लेने का निर्णय लिया है।
18. हम उक्त तथ्य को संज्ञान में लेते हैं और अपेक्षा करते हैं कि उक्त वापसी की कार्यवाही एक सप्ताह के भीतर कर दी जाएगी।
19. वर्तमान में प्राधिकरण इस बात को प्राथमिकता देंगे कि विशेष रूप से केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित क्षेत्रों में कोई व्यावसायिक गतिविधि संचालित न हो।
20. तदनुसार, निम्नलिखित निर्देश जारी किए जाते हैं:—
(i) वर्तमान में प्राधिकरण यह सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देंगे कि ऐसे क्षेत्रों में, जिन्हें स्पष्ट रूप से आवासीय क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है और जहाँ राज्य सरकार द्वारा दी गई अनुमति केवल आवासीय उपयोग के लिए है, वहाँ कोई व्यावसायिक गतिविधि न हो। यदि ऐसे क्षेत्रों में कोई व्यावसायिक गतिविधि संचालित पाई जाती है, तो प्रथम दृष्टया संबंधित परिसर को सील किया जाएगा।
(ii) ऐसे क्षेत्रों में, जिन्हें किसी विशिष्ट उपयोग—जैसे व्यावसायिक या आवासीय उपयोग—के लिए स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किया गया है, वहाँ मिश्रित उपयोग (Mixed Use) के प्रश्न पर भी विचार किए जाने की आवश्यकता हो सकती है। तथापि, फिलहाल यथास्थिति (status quo) में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद, कागजी/प्रशासनिक कार्यवाही आगे जारी रखी जा सकती है।
(iii) जिस भवन/भूमि/क्षेत्र के संबंध में कोई वाद (lis) लंबित हो—चाहे वह निजी व्यक्तियों के बीच स्वामित्व अथवा किसी अन्य विवाद से संबंधित हो, अथवा सरकार और संबंधित पक्ष के बीच विवाद हो—केवल उस वाद के लंबित होने से प्राधिकरण को उस परिसर को सील करने से नहीं रोका जाएगा, यदि उसका उपयोग उस उद्देश्य के विपरीत पाया जाता है जिसके लिए भूमि/भवन आवंटित किया गया था और जिसके लिए सक्षम प्राधिकारी ने योजना को स्वीकृत एवं अनुमोदित किया था।
21. यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि यह पाया जाता है कि कोई संरचना पूर्णतः अनधिकृत रूप से तथा किसी भी प्राधिकरण, विशेष रूप से सक्षम प्राधिकारी, की किसी स्वीकृति के बिना निर्मित की गई है, तो कानून के अनुसार आवश्यकतानुसार सील करने/ध्वस्तीकरण की कार्यवाही भी आगे जारी रहेगी।
22. हम यह स्पष्ट करते हैं कि वर्तमान कार्यवाही में इस न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुसार कार्य करने वाले सभी प्राधिकरण इस कार्यवाही को बिना किसी भेदभाव के करेंगे। यदि न्यायालय के संज्ञान में यह लाया जाता है कि प्राधिकरणों द्वारा चयनात्मक कार्रवाई (pick-and-choose approach) अपनाई गई है, तो न्यायालय इस संबंध में कठोर दृष्टिकोण अपनाएगा।
23. इस स्तर पर, विशेष रूप से भोपाल के संबंध में, विद्वान न्याय मित्र (Learned Amicus Curiae) ने न्यायालय को बताया कि उन्हें ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है कि एक ओर न्यायालय के आदेशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर इन आदेशों का चयनात्मक रूप से दुरुपयोग भी किया जा रहा है। ऐसा इसलिए कि किसी भवन/कॉम्प्लेक्स/संपत्ति को पहले सील कर दिया जाता है, लेकिन उसके बाद कुछ घंटों या दिनों के भीतर ही, बिना किसी ऐसे मध्यवर्ती घटनाक्रम के—जैसे कारण बताओ नोटिस का उत्तर प्रस्तुत किया जाना अथवा प्राधिकरण द्वारा कोई निर्णय लिया जाना—उसे पुनः अनसील (unseal) कर दिया जाता है।
24. इस स्तर पर श्री के.एम. नटराज, विद्वान ASG, ने प्रस्तुत किया कि राज्य सरकार द्वारा समिति गठित किए जाने के कारण कुछ भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है, जिसे अब वापस लिया जा रहा है और इसलिए उपर्युक्त समस्या अब उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
25. इस स्तर पर श्री के.एम. नटराज, विद्वान ASG, ने प्रस्तुत किया कि भोपाल का मास्टर प्लान वर्ष 1995 के बाद से संशोधित नहीं किया गया है और राज्य सरकार ने अब एक ड्राफ्ट मास्टर प्लान तैयार किया है। यह निवेदन किया गया कि न्यायालय राज्य सरकार को उक्त ड्राफ्ट मास्टर प्लान को प्रकाशित करने की अनुमति प्रदान करे, ताकि कम से कम आपत्तियाँ एवं सुझाव आमंत्रित किए जा सकें और आगे की प्रक्रिया प्रारंभ हो सके। हालांकि, यह आश्वासन दिया गया कि न्यायालय की अनुमति के बिना उक्त ड्राफ्ट मास्टर प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा।
26. इस विषय पर विचार करने के पश्चात, हम ड्राफ्ट राज्य मास्टर प्लान के प्रकाशन की अनुमति प्रदान करते हैं। हम यह स्पष्ट करते हैं कि किसी भी संपत्ति/निर्माण के संबंध में प्राधिकरणों द्वारा लागू किया जाने वाला परीक्षण यह होगा कि उक्त संपत्ति/निर्माण विद्यमान मास्टर प्लान तथा सक्षम प्राधिकारी के लागू भवन उपविधियों के अनुरूप है अथवा नहीं।
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जिन इलाकों के लैंड यूज स्पष्ट नहीं है या मिक्स्ड लैंड यूज हैं उनको सीलिंग की कार्रवाई से नहीं जोड़ा जाए,रहवासी इलाकों में अवैध व्यावसायिक ठिकानों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं रुके।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कमेटी गठित करने के कारण सरकार के खिलाफ कंटेंप्ट वाले मामले में कोर्ट के “एमिकस क्यूरी” AK Sinha ने की थी जांच।
सिन्हा ने SC को बताया कि कमेटी गठित कर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की है।
जिसके बाद MP के वकील एवं एएसजी नटराजन ने बताया कि सरकार ने आश्वासन दिया है कि अब कोई कमेटी नहीं बनेगी और ना ही सीलिंग की कार्रवाई बाधित की जाएगी।
SC ने सरकार के आश्वासन को स्वीकार किया (कंटेंप्ट नहीं लगाया, लेकिन लिखित आदेश की सलाह दी उसी से स्पष्ट होगा)
इसके बाद एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता एके सिनहा ने SC को बताया कि आज सुबह ही सुनवाई से पहले भोपाल के करीब 10 रहवासियों की शिकायतें आई।
SCI ने सुबह सीलिंग की कार्रवाई और शाम को प्रतिष्ठानों के खुलने पर जताई नाराजगी।
SC ने भोपाल से मिली शिकायतों पर कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कई जगह Full compliance “पूर्णतः पालन” नहीं हो रहा है विशेष रूप से भोपाल में।
SC ने कहा: *सीलिंग की कार्रवाई का सख्ती से और बिना किसी भेद भाँव के पालन करने के निर्देश हैं तो पूर्णतः पालन हो।
‘No Pick and Choose’
वकील नटराजन ने कोर्ट को बताया कि भोपाल में 1995 से अभी तक कोई मास्टर प्लान नहीं आया (2005 में एक्सपायर हुआ था)।
नटराजन ने SC से निवेदन किया कि नया मास्टर प्लान का ड्राफ्ट सरकार के पास है।
अब उसे लागू करना है।
सुप्रीम कोर्ट से मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने को लेकर मिली हरी झंडी।
भोपाल का ड्राफ्ट ‘मास्टर प्लान’ जारी होने पर मध्यप्रदेश सीएम मोहन यादव जी का संदेश।



