25 साल की यात्रा: उत्सव से आगे सेवा का संकल्प

ख़बर भारत की – 12 सितंबर 2026
25 साल की यात्रा: उत्सव से आगे सेवा का संकल्प
भारतीय राजनीति में 25 वर्ष का सार्वजनिक जीवन केवल समय की गणना नहीं, बल्कि नेतृत्व की कसौटी भी है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की संवैधानिक जिम्मेदारी से शुरू हुई यात्रा आज प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करने तक पहुंच चुकी है। एक संगठन के साधारण कार्यकर्ता से राज्य के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री तक का यह सफर भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक उभार की असाधारण कहानी है। अब भारतीय जनता पार्टी इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने को एक महीने लंबे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए जनता के बीच ले जाने जा रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस अभियान की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी इसे केवल प्रधानमंत्री के जन्मदिन या राजनीतिक उपलब्धियों के उत्सव के रूप में नहीं देख रही, बल्कि सेवा और जनभागीदारी से जोड़ना चाहती है। 17 सितंबर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से अभियान की शुरुआत होगी और 17 अक्टूबर तक देशभर में विभिन्न कार्यक्रम चलेंगे।
अभियान का पहला बड़ा पड़ाव 17 सितंबर को ‘सेवा दिवस’ के रूप में होगा। भाजपा कार्यकर्ता देशभर में रक्तदान शिविर और विभिन्न सेवा गतिविधियां आयोजित करेंगे। सेवा दिवस के दौरान सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री की सार्वजनिक यात्रा को आम नागरिकों की भागीदारी से जोड़ने का प्रयास होगा। इसी दिन शाम सात बजे ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री की 25 वर्षों की जनसेवा यात्रा के प्रति जनता की ओर से आभार और शुभकामना का भाव व्यक्त करना है।
इसके बाद 7 अक्टूबर का दिन अभियान का केंद्रीय पड़ाव होगा। इसी दिन नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होंगे। इस अवसर पर ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ निकाली जाएगी, जो वाराणसी से शुरू होकर वडनगर तक जाएगी। वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र रहा है, जबकि वडनगर उनका जन्मस्थान है। इसलिए इन दोनों स्थानों को जोड़ने वाली यात्रा प्रधानमंत्री की राजनीतिक यात्रा के राष्ट्रीय विस्तार और उनकी व्यक्तिगत जड़ों के बीच एक प्रतीकात्मक सेतु भी बनाती है।
अभियान को केवल बड़े शहरों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक सीमित रखने के बजाय भाजपा ने समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत जनप्रतिनिधि संवाद, स्कूल संवाद और आंगनवाड़ी संवाद जैसे कार्यक्रम होंगे। जनप्रतिनिधि संवाद के जरिए स्थानीय स्तर पर शासन और जनसेवा के अनुभवों पर चर्चा होगी, जबकि स्कूल संवाद युवा पीढ़ी के बीच प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और देश में हुए बदलावों को लेकर संवाद का माध्यम बन सकता है। आंगनवाड़ी संवाद के जरिए महिला, बाल विकास और जमीनी स्तर की सामाजिक योजनाओं से जुड़े कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का प्रयास होगा।
यहां अभियान का राजनीतिक और सामाजिक महत्व दोनों दिखाई देता है। भाजपा प्रधानमंत्री की 25 वर्षों की यात्रा को केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रही, बल्कि इसे भारत में आए व्यापक बदलावों की कहानी के साथ जोड़ रही है। नितिन नवीन ने गरीबी, अर्थव्यवस्था, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए इसी व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखा।
भाजपा का दावा है कि मोदी सरकार के दौरान 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए और भारत की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय प्रगति की। ‘फ्रैजाइल फाइव’ से दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की बात भी भाजपा के राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रतिष्ठा को भी पार्टी मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों से जोड़ रही है।
हालांकि, 25 वर्ष पूरे होने का अवसर केवल उपलब्धियों को गिनाने का अवसर नहीं होना चाहिए। इतनी लंबी सार्वजनिक यात्रा का सबसे स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यांकन उपलब्धियों के साथ चुनौतियों और आलोचनाओं को भी सामने रखकर ही संभव है। रोजगार, महंगाई, सामाजिक समरसता, संस्थागत जवाबदेही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रताओं जैसे विषयों पर भी समान गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। लोकतंत्र में प्रशंसा तभी सार्थक होती है, जब उसके साथ प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता भी बनी रहे।
‘सेवा संकल्प अभियान’ की सबसे बड़ी परीक्षा भी यहीं होगी। क्या सेवा दिवस के कार्यक्रम एक दिन तक सीमित रहेंगे? क्या रक्तदान और सामाजिक सेवा की गतिविधियां अभियान समाप्त होने के बाद भी जारी रहेंगी? क्या स्कूल और आंगनवाड़ी संवाद वास्तविक संवाद में बदलेंगे? क्या जनप्रतिनिधि संवाद से स्थानीय समस्याओं के समाधान की कोई स्थायी व्यवस्था विकसित होगी? इन सवालों के जवाब ही अभियान की वास्तविक सफलता तय करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को लेकर भाजपा के पास स्वाभाविक रूप से अपनी उपलब्धियों का राजनीतिक आख्यान है। विपक्ष के पास उसका अपना मूल्यांकन होगा। लेकिन जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न इससे अलग है—इन 25 वर्षों में उसके जीवन में कितना और कैसा परिवर्तन आया?
यही वह कसौटी है जिस पर किसी भी जननेता की अंतिम परीक्षा होती है। सत्ता में बने रहना राजनीतिक सफलता हो सकती है, लेकिन जनता के विश्वास को सेवा में बदलना ही सार्वजनिक जीवन की असली सफलता है। इसलिए ‘सेवा संकल्प अभियान’ का संदेश केवल मोदी के 25 वर्षों का उत्सव नहीं, बल्कि अगले चरण के लिए यह संकल्प होना चाहिए कि राजनीति का अंतिम लक्ष्य सत्ता नहीं, समाज की सेवा और राष्ट्रहित है।
यदि भाजपा इस एक महीने को नारों और आयोजनों से आगे ले जाकर वास्तविक जनसेवा, जनसंवाद और जनसमस्याओं के समाधान का अभियान बना पाती है, तो प्रधानमंत्री के 25 वर्षों की यात्रा का उत्सव एक राजनीतिक कार्यक्रम भर नहीं रहेगा—वह भारतीय लोकतंत्र में ‘सेवा’ की अवधारणा को फिर से केंद्र में लाने का अवसर बन सकता है।
सुमित मिश्र
अधिवक्ता, पत्रकार व लेखक हैं।
यह लेखक के निजी विचार हैं।



