
🇮🇳 ख़बर भारत की-10 अक्टूबर 2026, वायनाड |केरल|
🌱 सूखे पत्तों से उगा रहे आलू! केरल के किसान का अनोखा प्रयोग, कम जगह में सब्जियां उगाने का देसी तरीका
Report -Nidhi Chaurasia
केरल | खेती-किसानी विशेष
वायनाड |केरल | 10 अक्टूबर 2026
क्या आपने कभी सोचा है कि जिन सूखे पत्तों को हम कचरा समझकर फेंक देते हैं, उन्हीं से आलू और दूसरी सब्जियां उगाई जा सकती हैं? केरल के वायनाड के किसान सी. वी. वर्गीज ने खेती का एक ऐसा तरीका अपनाया है, जो जैविक खेती और सीमित जगह में सब्जियां उगाने के लिए लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
🌿 5 फीट ऊंचे टावर में उगा रहे आलू
किसान सी. वी. वर्गीज सूखे पत्तों, गोबर और अन्य जैविक सामग्री की मदद से जालीदार टावर तैयार करते हैं। करीब 5 फीट ऊंचे इन टावरों में आलू और दूसरी सब्जियां उगाने का प्रयोग किया जा रहा है।
इस तकनीक की खासियत यह है कि खेती के लिए जमीन पर बड़े खेत की जरूरत कम हो सकती है। जालीदार ढांचे में जैविक सामग्री का इस्तेमाल करके ऊर्ध्वाधर यानी ऊपर की ओर खेती की जाती है, जिससे उपलब्ध जगह का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
♻️ कचरे से खाद और खेती में मदद
सूखे पत्ते आमतौर पर झाड़ू लगाकर फेंक दिए जाते हैं या जला दिए जाते हैं। लेकिन इनका उचित तरीके से इस्तेमाल मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और खाद बनाने में मदद कर सकता है। गोबर और दूसरी जैविक सामग्री के साथ इनका उपयोग खेती के लिए उपयोगी संसाधन तैयार करने का एक तरीका है।
🏡 कम जगह में खेती करने वालों के लिए उपयोगी विचार
शहरों में रहने वाले लोग, जिनके पास बड़ा बगीचा या खेत नहीं है, वे भी सीमित जगह में सब्जियां उगाने के नए तरीकों की तलाश करते हैं। ऐसे में जालीदार टावर में खेती का यह प्रयोग घरेलू बागवानी और जैविक खेती में रुचि रखने वालों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है।
हालांकि, इस तकनीक से मिलने वाली पैदावार मिट्टी या जैविक सामग्री की गुणवत्ता, नमी, जल निकासी, धूप और फसल की देखभाल पर निर्भर करेगी।
🌾 संदेश: कचरा नहीं, खेती का संसाधन हैं सूखे पत्ते
केरल के किसान सी. वी. वर्गीज का यह प्रयोग बताता है कि कृषि में स्थानीय संसाधनों का रचनात्मक उपयोग किया जा सकता है। सूखे पत्तों को बेकार समझकर फेंकने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करके खाद और खेती में इस्तेमाल किया जा सकता है।
सीख यही है—प्रकृति से मिलने वाले संसाधनों का सही इस्तेमाल करके खेती को अधिक उपयोगी और टिकाऊ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।


