Twisha Sharma-भोपाल की ज़िला अदालत ने पति समर्थ और सास गिरिबाला सिंह (एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त ज़िला न्यायाधीश) को 2 जून तक 5 दिन की CBI हिरासत भेजा ..अंतिम घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन

Twisha Sharma मौत मामला: ताज़ा अपडेट (29 मई, 2026 तक)-भोपाल की ज़िला अदालत ने Twisha Sharma के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह (एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त ज़िला न्यायाधीश) को 2 जून तक 5 दिन की CBI हिरासत में भेज दिया है।
पूछताछ: सूत्रों के मुताबिक CBI आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करेगी। वे भोपाल के कटारा हिल्स स्थित आवास पर Twisha Sharma के अंतिम घंटों का वर्चुअल रीएनेक्टमेंट (पुनर्निर्माण) करने की योजना बना रहे हैं।जांच में अब ‘टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। जांच एजेंसी समर्थ से यह भी पूछेगी कि फरारी के दौरान वह कहां रहा और किन लोगों के संपर्क में था।
Twisha Sharma , जो 33 वर्षीय मॉडल, अभिनेत्री और MBA स्नातक (पूर्व मिस पुणे) थीं, 12 मई, 2026 को अपनी शादी के ठीक पाँच महीने बाद अपने ससुराल में मृत पाई गईं। पहले पोस्टमार्टम में मौत का कारण फांसी लगाना बताया गया था, लेकिन शरीर पर मौत से पहले की कुछ अतिरिक्त चोटों का भी ज़िक्र किया गया था।
आरोप: Twisha Sharma के परिवार ने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि दहेज की मांगों में ₹2 लाख की रकम और शादी के खर्चों को लेकर ताने मारना शामिल था। वे आरोप लगाते हैं कि यह आत्महत्या का रूप देकर की गई हत्या है।
बचाव पक्ष: सिंह परिवार का दावा है कि यह आत्महत्या थी, और इसके लिए वे त्विशा की कथित मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं (बाइपोलर डिसऑर्डर) का हवाला देते हैं। वे दहेज की मांगों से इनकार करते हैं।
जाँच की प्रगति
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और मध्य प्रदेश सरकार की अधिसूचना के बाद CBI ने इस मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली। उन्होंने FIR को फिर से दर्ज़ किया।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत रद्द किए जाने के बाद उन्हें हाल ही में गिरफ़्तार किया गया। समर्थ सिंह ने पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था और वे पहले से ही हिरासत में थे।
CBI की टीमों ने घटनास्थल का दौरा किया है, घर की 3D मैपिंग की है, सबूत इकट्ठा किए हैं, और आरोपियों की मेडिकल जाँच करवाई है।
पहले उठाए गए कदमों में घटनास्थल का पुनर्निर्माण, CCTV फुटेज की समीक्षा (जिसमें Twisha को छत की ओर जाते हुए और बाद में CPR देने की कोशिशें करते हुए दिखाया गया है), और दूसरे पोस्टमार्टम की मांग शामिल थी।
इस मामले ने मीडिया का काफ़ी ध्यान खींचा है, और Twisha का परिवार (उनके भाई मेजर हर्षित शर्मा सहित) न्याय के लिए ज़ोरदार मांग कर रहा है। अदालतों ने सार्वजनिक बयान देने में संयम बरतने की सलाह दी है, ताकि जाँच पर कोई बुरा असर न पड़े।
यह एक तेज़ी से आगे बढ़ने वाला मामला है, जिसकी CBI द्वारा सक्रिय रूप से जाँच की जा रही है। परिणाम फोरेंसिक साक्ष्य, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयानों और घटना के पुनर्निर्माण पर निर्भर करेंगे।
वर्चुअल री-एक्टमेंट के फ़ॉरेंसिक विवरण

CBI, Twisha के 12 मई, 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में बिताए गए आखिरी घंटों का विस्तृत वर्चुअल/डिजिटल रिकंस्ट्रक्शन करने के लिए “टनल व्यू” तकनीक नामक एक उन्नत जांच पद्धति का उपयोग कर रही है।
“टनल व्यू” तकनीक क्या है?
यह कई डेटा स्रोतों को अपराध स्थल के एक एकीकृत, टाइमस्टैम्प्ड डिजिटल मॉडल में सिंक्रनाइज़ करके एक पलदरपल की वर्चुअल टाइमलाइन तैयार करती है। इससे जांचकर्ताओं को घटनाओं को एक सिम्युलेटेड वॉकथ्रू या “डिजिटल अवतार” रिकंस्ट्रक्शन के रूप में देखने में मदद मिलती है।
एकीकृत किए गए मुख्य डेटा स्रोत:
CCTV फुटेज (घर में लगे सर्विलांस कैमरों के टाइमस्टैम्प)।
मोबाइल फ़ोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDRs), और इंटरनेट/स्मार्टडिवाइस गतिविधि।
WiFi लॉग और नेटवर्क उपयोग।
घर की फोरेंसिक मैपिंग और 3D स्कैनिंग (जिसमें सभी मंजिलों के कमरे शामिल हैं)।
गवाहों के बयान और विवरण।
अन्य डिजिटल साक्ष्य (जैसे, यदि प्रासंगिक हो तो संभावित WhatsApp/चैट लॉग)।
रिकंस्ट्रक्शन के उद्देश्य
घर के भीतर Twisha की सटीक गतिविधियों का पता लगाना (जैसे, वह कब छत पर या अन्य क्षेत्रों में गईं)।
यह पहचानना कि किन विशिष्ट कमरों/क्षेत्रों में, ठीक किस समय कौन प्रवेश किया या बाहर निकला।
उनकी मृत्यु की ओर ले जाने वाली घटनाओं का एक सटीक क्रम स्थापित करना।
समय के अंतरालों, संदिग्ध गतिविधियों, बयानों में विसंगतियों, या घटना के बाद साक्ष्यों के साथ संभावित छेड़छाड़ का पता लगाना।
यह निर्धारित करना कि क्या कोई ज़बरदस्ती, साज़िश, या घटनास्थल के साथ कोई हेरफेर किया गया था।
यह डिजिटल मॉडल समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह (जो अब 5 दिन की CBI रिमांड पर हैं) से आमनेसामने की पूछताछ में सहायक होगा। इसका उपयोग आमनासामना (confrontations) के दौरान उनके बयानों की जांच, रिकंस्ट्रक्टेड टाइमलाइन के आधार पर करने के लिए किया जाएगा।
CBI टीमों ने पहले अपराध स्थल का भौतिक दौरा किया था और 3D मैपिंग की थी।
इससे पहले, भोपाल पुलिस की SIT समर्थ सिंह को भौतिक रीएनेक्टमेंट के लिए घर ले गई थी।
यह वर्चुअल संस्करण, अधिक सटीकता और निष्पक्षता के लिए गहन डिजिटल फोरेंसिक का उपयोग करके, पिछले कदमों को ही आगे बढ़ाता है। यह फ़ॉरेंसिक टूल उन मामलों में खास तौर पर उपयोगी है जहाँ दावे आपस में टकराते हैं (जैसे आत्महत्या बनाम हत्या/दहेज हत्या) और जहाँ भौतिक सबूत विवादित होते हैं (जैसे चोटें, गला घोंटने में इस्तेमाल हुई चीज़ें)। इस पुनर्निर्माण से मिले नतीजे, मेडिकल/फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट और पूछताछ के साथ मिलकर, CBI के निष्कर्षों के लिए बेहद अहम साबित होंगे।
जांच अभी भी जारी है और सक्रिय रूप से चल रही है — इसके नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि डिजिटल टाइमलाइन, बयानों और अन्य सबूतों के साथ कितनी अच्छी तरह मेल खाती है।



