अमित शाह ने सुवेंदु अधिकारी को भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने पर हार्दिक बधाई को ,बंगाल की जनता ने भय, घुसपैठ, भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण के विरुद्ध प्रचंड जनादेश देकर भारतीय जनता पार्टी को सेवा का अवसर प्रदान किया है।

अमित शाह ने सुवेंदु अधिकारी को भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने पर हार्दिक बधाई को ,बंगाल की जनता ने भय, घुसपैठ, भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण के विरुद्ध प्रचंड जनादेश देकर भारतीय जनता पार्टी को सेवा का अवसर प्रदान किया है।मोदी जी के नेतृत्व में बंगाल की भाजपा सरकार प्रदेश में विकास, सुरक्षा और समृद्धि का एक नया अध्याय लिखेगी।
उभार: 3 सीटों से 207 सीटों तक
2016 विधानसभा चुनाव: BJP ने सिर्फ़ 3 सीटें जीतीं (लगभग 10% वोट शेयर)। TMC का दबदबा था।
2021: BJP 77 सीटों तक पहुँच गई (मज़बूत विपक्ष), जिसमें सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर खास पहचान बनाई। TMC के पास तब भी 213 सीटों के साथ सत्ता थी।
2026 विधानसभा चुनाव: BJP ने 207 सीटों के साथ ज़बरदस्त जीत हासिल की (बहुमत का आँकड़ा 294 में से 148 है), जिससे TMC का 15 साल का राज खत्म हो गया (TMC की सीटें घटकर लगभग 80 रह गईं)। यह पश्चिम बंगाल में BJP की पहली सरकार है।
इस बदलाव में वोटों का एक साथ आना (रिपोर्टों में हिंदू और आदिवासी वोटों का ज़िक्र है), TMC के खिलाफ सत्ताविरोधी लहर, कानून-व्यवस्था/विकास पर ज़ोर, और केंद्र सरकार की योजनाओं का हाथ था।
सुवेंदु अधिकारी: ममता के बागी और मुख्य रणनीतिकार
सुवेंदु अधिकारी (जन्म 1970), जो पूर्वी मिदनापुर के एक राजनीतिक रूप से असरदार परिवार से आते हैं, लंबे समय तक TMC के नेता और ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री रहे थे। 2021 के चुनावों से पहले वह BJP में शामिल हो गए और विपक्ष का एक बड़ा चेहरा बन गए।

उन्होंने नंदीग्राम (2021) में ममता को हराया।
2026 में, उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर (ममता की सीट) दोनों जगहों से चुनाव लड़ा। उन्होंने दोनों सीटें बड़े अंतर से जीतीं: भवानीपुर में ममता को 15,000 से ज़्यादा वोटों से हराया और नंदीग्राम में अपने विरोधी को लगभग 9,665 वोटों से हराया।
8 मई, 2026 को, अमित शाह की मौजूदगी में उन्हें BJP विधायक दल का नेता चुना गया। वह 9 मई, 2026 को पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले हैं (राज्य में BJP के पहले मुख्यमंत्री)।
अधिकारी को अक्सर “जायंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने ममता को सीधे चुनौती दी और बंगाल में BJP की संगठन शक्ति को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
ऐसे हावभाव अकेले “सब कुछ नहीं बदल देते”—इसके पीछे व्यापक कारक ज़मीनी स्तर पर किया गया काम, गठबंधन, चुनावी रणनीति और मतदाताओं की भावनाएँ थीं—लेकिन ये शुभेंदु के शाह और मोदी जैसे नेताओं के नेतृत्व में राष्ट्रीय BJP व्यवस्था में शामिल होने का प्रतीक हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
वामपंथी दलों और उसके बाद TMC के दशकों के शासन के बाद यह एक ऐतिहासिक “पोरीबोरतोन” (बदलाव) है। आगे की चुनौतियों में चुनाव के बाद के तनाव/हिंसा की रिपोर्टों को संभालना, ध्रुवीकृत राज्य में शासन चलाना और विकास के वादों को पूरा करना शामिल है। शुभेंदु की स्थानीय जड़ें और प्रशासनिक अनुभव उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए एक मज़बूत दावेदार बनाते हैं।

यह कहानी इस बात पर ज़ोर देती है कि कैसे प्रमुख नेताओं का दलबदल, लगातार चुनाव प्रचार और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बदलाव पश्चिम बंगाल जैसे विशाल और प्रभावशाली राज्य की राजनीति को तेज़ी से बदल सकते हैं।



